
महालया के अवसर पर सांस्कृतिक प्रेमी संदीप भूतोड़िया ने देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय की गाथा ‘महिषासुर मर्दिनी की गाथा’ को अपनी आवाज दी है। पहली बार हिंदी में प्रस्तुत इस विशेष प्रोडक्शन को ‘महालया: द स्टोरी ऑफ दुर्गा’ नाम से जारी किया गया है। इसमें भूतोड़िया के कथावाचन के साथ प्रख्यात गायिका शुभा मुद्गल के गीत शामिल हैं। संगीतकार जोड़ी सौरेन्द्र–सौम्योजित की परिकल्पना और पहल पर तैयार यह प्रस्तुति अब उनके यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है। राजस्थान फोरम के संस्थापक और कल्चरिस्ट श्री भूतोड़िया न केवल देशभर में, बल्कि विशेष रूप से जयपुर और राजस्थान में सांस्कृतिक गतिविधियों के सक्रिय प्रवर्तक रहे हैं। जयपुर में उन्होंने कई ऐसी पहलें की हैं, जिन्होंने शहर की कला, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
बंगाल में कई पीढ़ियों से महिषासुर मर्दिनी लोगों की बचपन की यादों का अभिन्न हिस्सा रही है। महालया की सुबह चार बजे रेडियो पर इसका प्रसारण सुनना एक विशेष परंपरा रही है। बंगाल में जन्मे और पले-बढ़े संदीप भूतोड़िया का लंबे समय से इस सांस्कृतिक विरासत को बंगाली भाषी समुदाय से आगे देश-दुनिया तक पहुंचाने का विचार था। हिंदी में तैयार यह प्रस्तुति इसी विचार को साकार करती है। इसके माध्यम से मां दुर्गा की कथा देशभर के श्रोताओं, विदेशों में रहने वाले भारतीयों और भारतीय कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले दुनिया भर के लोगों तक पहुंचेगी।
कथावाचक के रूप में भूतोड़िया श्रोताओं को इस पौराणिक कथा के विभिन्न प्रसंगों से परिचित कराते हैं। उनका कथावाचन गीतों के साथ सहज रूप से जुड़ता है। शुभा मुद्गल भी कथावाचन और गायन, दोनों में उनका साथ देती हैं। इस तरह यह प्रस्तुति मूल कथा के आध्यात्मिक भाव को बरकरार रखते हुए बच्चों और नई पीढ़ी के श्रोताओं के लिए भी इसे सहज और रोचक बनाती है, जो पहली बार इस कथा से परिचित हो रहे हैं। यह प्रस्तुति श्री बाणी कुमार, पंकज कुमार मल्लिक और बीरेंद्र कृष्ण भद्र की मूल रचनाओं पर आधारित है। इसकी हिंदी पटकथा प्रख्यात अभिनेता एवं निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने तैयार की है। पारंपरिक मंत्रोच्चार, समकालीन संगीत और सहज कथावाचन के माध्यम से इस प्रस्तुति में संस्कृत और हिंदी का सुंदर समन्वय किया गया है।


