वर्ल्ड ऑफ वर्ड्स बुक क्लब में सुनील अटोलिया की पुस्तकों पर हुई सार्थक चर्चा

शनिवार वर्ल्ड ऑफ वर्ड्स बुक क्लब की साहित्यिक बैठक में लेखक सुनील अटोलिया की दो चर्चित कृतियों “मैं बहर मैं हूँ” (शायरी संग्रह) और “दोहे मोहे सोहे” (दोहा संग्रह) पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों पुस्तकें वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हैं और गंगा-जमुनी तहज़ीब, मानवीय संवेदनाओं तथा जीवन के विविध अनुभवों को सहज और प्रभावशाली भाषा में अभिव्यक्त करती हैं।
“दोहे मोहे सोहे” पर चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि वर्तमान समय में जहाँ मुक्त छंद और आधुनिक काव्य विधाएँ अधिक लोकप्रिय हो रही हैं, वहीं दोहा लेखन अपेक्षाकृत कम होता जा रहा है। ऐसे दौर में सुनील अटोलिया ने इस समृद्ध काव्य परंपरा को पुनर्जीवित करने का सराहनीय प्रयास किया है। उन्होंने दोहा विधा की गरिमा, उसकी लयात्मकता और सामाजिक प्रासंगिकता को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम में कार्यरत सुनील अटोलिया ने साझा किया कि ये दोनों संग्रह उनके पिछले 30 वर्षों की जीवन-यात्रा के अनुभवों का काव्यात्मक संकलन हैं, जिनमें जीवन के विविध रंग कविताओं, नज़्मों, ग़ज़लों और दोहों के रूप में अभिव्यक्त हुए हैं। उन्होंने अपनी लेखन-यात्रा के अनुभव साझा किए, शायरी लिखने के व्यावहारिक सुझाव दिए तथा निरंतर सीखते रहने की अपनी साहित्यिक साधना पर भी प्रेरक संवाद किया। सेशन में वैंकटेश दाधीच ने कुछ ग़ज़लें गाकर भी प्रस्तुत की। कार्यक्रम में देव थावरानी ने उर्दू के अल्फाज़ो की व्याख्या की और रिनी ने सत्र का सञ्चालन किया।
वर्ल्ड ऑफ वर्ड्स बुक क्लब प्रत्येक शनिवार साहित्य प्रेमियों, लेखकों और पाठकों को एक साझा मंच प्रदान करता है, जहाँ पुस्तकों पर सार्थक विमर्श, विचारों का आदान-प्रदान और रचनात्मक संवाद के माध्यम से पढ़ने और लिखने की संस्कृति को सशक्त बनाया जाता है। यह मंच साहित्य को केवल पढ़ने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे समझने, महसूस करने और समाज से जोड़ने का अवसर भी देता है।



