
जयपुर- बूंदी के हाड़ा राजवंश की गौरवगाथा में तलवार की धार और भावों में सिंह की दहाड़ है, इसमें वात्सल्य की कोमलता भी है और बदले की आग भी, प्रेम की गाथा है तो विरह की वेदना भी, वफादारी का सबब भी है तो दगाबाज़ी का दाग भी है, अन्तर्मन की पीड़ा भी है तो आध्यात्म की शांति भी। आर. एस. क्लब, जयपुर में आयोजित ‘हाड़ा एक विहंगम गाथा’ ऐतिहासिक उपन्यास के विमोचन समारोह में अपने लेखन संबन्धित अनुभव साझा करते हुए पूर्व प्रशासनिक अधिकारी श्री राजेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि इस पुस्तक में राव रण सिंह से लेकर राजा विशन सिंह तक, उनके युद्ध, नीति, पराक्रम, और त्याग की अनकही कहानियाँ संजोयी गई हैं। उन्होने कहा कि आज केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं, बल्कि हाड़ा राजवंश की अमर गाथाओं को जन-जन तक पहुँचाने की एक ऐतिहासिक पहल है। अपने युवा काल में शिक्षा के दौरान मुझे कोटा-बूंदी के राजपरिवारों का सानिध्य मिला और हाड़ाओं कि कहानियाँ सुनी, तभी से मन में था कि हाड़ाओं की वीरता, त्याग और बलिदान की गाथाओं को विस्तार से रुचिकर साहित्य के रूप में प्रस्तुत किया जाए। यह उपन्यास वर्षों की साधना, शोध और समर्पण का परिणाम है और यह कृति राजस्थान की वीरता, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का विशिष्ट दस्तावेज है। उल्लेखनीय है कि चौरासी वर्षीय राजेंद्र कुमार शर्मा की यह आठवीं कृति है, जो उनके दशकों के शोध और अनुभवों का परिणाम है। उन्होंने हाड़ा राजपूतों की जीवनशैली, वीरता, परंपराओं और विरासत को न केवल इतिहास के दृष्टिकोण से बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ प्रस्तुत किया है।
इस अवसर पर विख्यात इतिहासकारों एवं साहित्य शिरोमणियों की उपस्थिति रही। जैन विश्व भारती विश्वविध्यालय की संस्कृत और प्राकृत भाषा की प्रोफेसर श्रीमती सुषमा सिंघवी ने उपन्यास की समीक्षा करते हुए कहा कि भाषा और शैली के साथ अलंकरणों का प्रयोग, अविवेकपूर्ण निर्णयों पर खरी-खरी बात के साथ राजपूती निर्णयों का विवेचन और बलिदान के साथ वात्सल्य के भावपूर्ण शब्द चित्रण ने इसे जीवंत बना दिया है। हिन्दी, अंग्रेज़ी और संस्कृत के विद्वान नरेंद्र शर्मा’कुसुम’ ने ‘हाड़ा एक विहंगम गाथा’ उपन्यास को एक कालजयी रचना की श्रेणी में रखते हुए कहा कि इतिहास को रचना और रोमांच से प्रस्तुत करना विषय वस्तु पर लेखकीय पकड़ का सशक्त प्रमाण है। इस अवसर पर साहित्यकार कृष्ण शर्मा, भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी आर. सी. जैन, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र बोड़ा, राजस्थान हॉस्पिटल के चेयरमेन डॉक्टर एस एस अग्रवाल, जन स्वास्थ्य से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर एस. सी. माथुर, तथा पद्मश्री उस्ताद अहमद हुसैन-मोहम्मद हुसैन बंधु शामिल रहे। वक्ताओं ने पुस्तक के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयामों का विस्तार से उल्लेख करते हुए राजेंद्र कुमार शर्मा के जीवन के प्रशासनिक अनुभवों और उनके जीवन से जुड़े कई अनछुए पहलुओं को भी साझा किया। हाड़ा रियासत का प्रतिनिधित्व करते हुए , ठाकुर रणजीत सिंह हाड़ा के पौत्र धनंजय सिंह ने भी समारोह की गरिमा को बढ़ाया उन्होने कहा कि यह पुस्तक हाड़ाओं के इतिहास को सिलसिलेवार घटनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करने का एक महत्त्वपूर्ण शोधपरक दस्तावेज़ है। कार्यक्रम में प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और साहित्य-प्रेमियों की उपस्थिति ने इसे एक यादगार अवसर बना दिया। यह पुस्तक निश्चय ही राजस्थानी इतिहास और साहित्य जगत के लिए एक अनमोल धरोहर के रूप में मानी जाएगी। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी और लेखक हेमंत आचार्य ने किया।


