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भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय में पर्यावरण संरक्षण पर व्याख्यान का आयोजन

जयपुर, 05 जून, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डॉ.भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर द्वारा “स्वदेशी संरक्षण पद्धतियों के माध्यम से सतत विकास” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का ऑनलाइन आयोजन किया गया। जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ) निष्ठा जसवाल ने की तथा प्रख्यात पर्यावरणविद् श्री एसपी मेहरा  ने मुख्य वक्ता के रूप में विशेष उद्बोधन दिया। कार्यक्रम की समन्वयक डॉ मीनाक्षी कुमावतथी। कुलसचिव श्री वीरेंद्र वर्मा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो.(डॉ) निष्ठा जसवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता में प्रकृति को पूजनीय माना गया है। पर्यावरण संरक्षण केवल एक कानूनी या नीतिगत विषय नहीं बल्कि मानवीय उत्तरदायित्व भी है। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए पर्यावरणीय संरक्षण तथा विकास के मध्य संतुलन स्थापित करना समय की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय पर्यावरणीय चेतना, जलवायु न्याय एवं सतत विकास से जुड़े विषयों पर शैक्षणिक विमर्श को निरन्तर प्रोत्साहित कर रहा है।

विशेष व्याख्यान देते हुए प्रख्यात पर्यावरणविद् श्री एसपी मेहरा ने कहा कि भारत की पारम्परिक एवं स्वदेशी संरक्षण पद्धतियाँ प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना पर आधारित रही हैं। उन्होंने बिश्नोई समुदाय के पवित्र उपवनों एवं पारम्परिक जल संरक्षण प्रणालियों तथा सामुदायिक संसाधन प्रबंधन के विविध उदाहरणों के माध्यम से बताया कि स्थानीय ज्ञान और परम्परागत जीवन शैली आज भी पर्यावरणीय संकटों के समाधान प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के क्षरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी चुनौतियों का सामना करने में स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं।

श्री मेहरा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का अंग बनाते हुए प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन करें तथा स्थानीय संरक्षण परम्पराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएँ साथ संवाद  सत्र के दौरान उन्होनें प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर प्रवीणता से दिया गया।कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में ऑनलाइन उपस्थित रहे।

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