
उप-मुख्यमंत्री और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा सोमवार को हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (एचजेयू) के दहमीकलां स्थित नए परिसर पहुंचे। एचजेयू के दहमीकलां (बगरू) स्थित स्थायी परिसर में शिफ्ट होने के बाद पहली बार विश्वविद्यालय के दौरे पर पहुंचे उप-मुख्यमंत्री ने परिसर का निरीक्षण कर सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने ‘हरयालो राजस्थान’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण भी किया। श्री बैरवा ने विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित न्यूज लेटर ‘एचजेयू संवाद’ का विमोचन भी किया।
उप-मुख्यमंत्री बैरवा ने एचजेयू के स्थायी परिसर में शिफ्ट होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया के शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए जरूरी सुविधाएं जैसे स्टूडियो, कम्प्यूटर लैब आदि की सुविधाएं अब ज्यादा बेहतर तरीके से मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को यातायात की सुविधा मुहैया करवाने के प्रयास हो रहे हैं और जल्द ही विश्वविद्यालय को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ा जाएगा। विश्वविद्यालय में छात्रावास निर्माण भी करवाया जाएगा ताकि राज्य के दूसरे क्षेत्रों और अन्य राज्यों से आने वाले विद्यार्थियों को असुविधा न हो। विश्विद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के पूर्ण रूप से लागू होने और शिक्षकों की पदोन्नति का कार्य पूर्ण करने के लिए उपमुख्यमंत्री ने कुलगुरु प्रो. सुधि राजीव की प्रशंसा की।
इससे पहले कुलगुरु प्रो. सुधि राजीव ने अपने स्वागत संबोधन में गत तीन वर्ष की विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद विश्वविद्यालय ने हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन का प्रयास किया है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा कुलदीप रांका ने कहा कि देश को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने में मानव संसाधन की अहम भूमिका है और विश्वविद्यालय युवाओं को इसके लिए तैयार करेंगे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शालिनी जोशी ने किया और कुलसचिव बी.एल. मेहरड़ा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक डॉ. सत्येंद्र बसवाल, अकादमिक एवं प्रशासनिक समन्वयक डॉ. रतन सिंह शेखावत, पत्रकारिता संकाय के डीन डॉ. अनिल मिश्र, जनसंचार संकाय की डीन डॉ. ऋचा यादव, शोध केंद्र के प्रमुख डॉ. अजय कुमार सिंह, प्रोक्टर गरिमा श्री और विश्वविद्यालय के समस्त कर्मचारी-अधिकारी और विद्यार्थी उपस्थित थे।


