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अणुव्रत काव्य धारा का आयोजन

अणुव्रत के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आज अणुविभा जयपुर केन्द्र में अणुव्रत काव्य धारा कार्यक्रम का आयोजन अणुव्रत समिति जयपुर द्वारा बहुश्रुत परिषद की सम्मानित सदस्या शासन गौरव साध्वी श्री कनकश्री जी के सानिध्य में आयोजित किया गया। जिसका विषय था अणुव्रत की डोर ~ देश बने सिरमौर। अणुव्रत काव्य धारा का उद्देश्य अणुव्रत के दर्शन और इसके सिद्धांतों को काव्य पाठ के माध्यम से प्रचारित व प्रसारित करना है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि, रचनाकार, लेखक एवं साहित्यकार आमंत्रित किए गए । कार्यक्रम में कुल 11 रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी तथा अणुव्रत आचार्य संहिता के ग्यारह नियमों को काव्य पाठ के माध्यम से समझाने का प्रयास किया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीश्री कनक श्री जी एवं साध्वीवृंद ने नमस्कार महामंत्र के पावन उच्चारण के साथ की। तत्पश्चात महिला मंडल शहर की सदस्याओं द्वारा मंगलाचरण स्वरूप अणुव्रत गीत का संगान किया गया । अणुव्रत समिति जयपुर के अध्यक्ष श्री विनोद जी बैद ने अणुव्रत आचार संहिता का वाचन किया जिसे महाप्रज्ञ सभागार में उपस्थित सभी सहभागियों ने दोहराया। आमंत्रित अतिथियों का स्वागत अणुव्रत समिति के निवर्तमान अध्यक्ष श्री विमल जी गोलछा ने करते हुए बताया कि जयपुर अणुव्रत समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष काव्य धारा का आयोजन किया जा रहा है तथा इस क्रम में यह चौथी काव्य धारा है । कार्यक्रम में संभागी बने रचनाकारों ने आचार संहिता के 11 नियमों पर अपनी काव्य रचनाएं प्रस्तुत की तथा प्रत्येक संभागी ने आचार संहिता के एक नियम को अपनी अभिव्यक्ति प्रदान की । सम उपस्थित रचनाकारों एवं साहित्यकारों में डॉ मधु भट्ट तेलंग, श्रीमती सोनू यशराज, श्री ललित अकिंचन, श्री सुभाषचन्द्र शर्मा, डॉ. राधेश्याम भारतीय, डॉ. क्षिप्रा नत्थानी, श्रीमती अंशु हर्ष, रेनू शब्दमुखर, योगाचार्य डॉक्टर नरेंद्र शर्मा “कुसुम” एवं डॉक्टर रेखा गुप्ता प्रमुख थे । साध्वी श्री मधुलेखा ने भी व्यसन मुक्त जीवन पर साध्वीश्री कनकश्री जी की सारगर्भित रचना प्रस्तुत की । सभी कवियों द्वारा प्रस्तुत की गई रचनाओं की उपस्थित श्रोताओं द्वारा भूरि भूरि प्रशंसा की गई। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री शांतिलाल जी गोलछा एवं अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश जी नाहर ने भी अपने विचार रखे। श्री अविनाश जी नाहर ने अणुव्रत के विभिन्न प्रकल्पों के बारे में सारगर्भित जानकारी देते हुए अणुव्रत के नियमों को अपनाने के महत्व पर प्रकाश डाला । साध्वीश्री कनकश्री जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि जीवन की अनेक समस्याओं को चरित्र निर्माण द्वारा सुलझाया जा सकता है । उन्होंने गुरुदेव श्री तुलसी के महत्वपूर्ण अवदान अणुव्रत के बारे में बताते हुए कहा कि अणुव्रत आचार संहिता के 11 नियमों में जीवन की अनेक समस्याओं के निराकरण का मार्ग प्रशस्त किया गया है। साध्वी श्री ने यह भी बताया कि अणुव्रत के सिद्धांत किसी धर्म विशेष के लिए नहीं है बल्कि सभी धर्म के अनुयायी इसे अपना कर अपने जीवन को सफल और उत्कृष्ट बना सकते हैं।

इससे पूर्व संयोजक श्री पवन जैन ने आमंत्रित अतिथियों को साध्वीश्री कनक श्री जी का परिचय देते हुए बताया कि वे तेरापंथ धर्म संघ की एक विशिष्ट साध्वी हैं, बहुश्रुत परिषद की सदस्या हैं तथा शासन गौरव के अलंकरण से अलंकृत हैं। उन्हें हिंदी, संस्कृत, प्राकृत आदि विभिन्न भाषाओं तथा न्याय दर्शन आदि विविध विधाओं में प्रवीणता प्राप्त हैं तथा उनकी अनेक साहित्यिक कृतियां, गीत, काव्य आदि प्रकाशित हो चुके हैं । कार्यक्रम के दौरान अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा आयोजित शॉर्ट वीडियो कॉम्पीटिशन 2025 प्रकृति के प्रहरी में रचनात्मक प्रतिभा का परिचय देने के फल स्वरुप सुश्री रिया व्यास को सांत्वना पुरस्कार के रूप में प्रमाण पत्र तथा साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में संभागी बने सभी कवि/कवियत्री गणों को पटका पहनाकर अणुव्रत साहित्य एवं अणुव्रत आचार संहिता पटृ देकर सम्मानित किया गया । काव्य धारा के उपरोक्त कार्यक्रम में समाज के गण मान्य व्यक्ति श्री पन्नालाल जी बैद, श्री दलपत जी लोढा, श्री राजकुमार जी बरडिया, श्री ओमप्रकाश जैन, श्री राजेन्द्र बांठिया, अणुविभा के न्यासी श्री पंचशील जी जैन, तेरापंथी सभा के मंत्री श्री सुरेन्द्र जी सेखानी, अखिल भारतीय महिला मंडल की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती पुष्पा बैद, श्रीमती आशा टाक , महिला मंडल सी स्कीम की अध्यक्षा श्रीमती कौशल्या जैन तथा महिला मंडल शहर की अध्यक्षा श्रीमती कनक आंचलिया, तेरापंथ प्रोफेशनल फॉर्म की अध्यक्षा डॉ. प्रज्ञा कावड़िया उपस्थित थे। कार्यक्रम का कुशल संचालन समिति उपाध्यक्ष श्री पवन जैन ने किया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद मंत्री डॉ. जयश्री सिद्धा ने ज्ञापित किया।

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