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जवाहर कला केंद्र में ‘हिमापन’ : कमल पत्तों पर सृजन का आध्यात्मिक संवाद

जयपुर स्थित जवाहर कला केंद्र (जेकेके) में  सपना महेश की अनूठी प्रदर्शनी ‘हिमापन’ देखने का अवसर मिला। यह प्रदर्शनी केवल चित्रों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रकृति, तत्वों और चेतना के साथ एक आत्मीय संवाद का अनुभव है।

‘हिमापन’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक कैनवास की जगह असली कमल के पत्तों को आधार बनाया गया है। यहाँ कमल पत्ता मात्र एक सतह नहीं, बल्कि एक सक्रिय सह-रचनाकार के रूप में उपस्थित है। उसकी स्वाभाविक नसें, बनावट, समय के साथ होता क्षरण और रंगों के साथ उसका संवाद  सब मिलकर एक जीवंत कलाकृति का रूप लेते हैं।

सपना महेश ने अलग-अलग शहरों से लाए गए पत्थरों पर भी कलाकृतियाँ उकेरी हैं, जिससे यह प्रदर्शनी प्रकृति और सृजन का अनोखा संगम बन जाती है। पत्थरों की कठोरता और कमल पत्तों की कोमलता  दोनों के बीच संतुलन स्थापित कर उन्होंने यह संदेश दिया है कि सृजन हर तत्व में विद्यमान है।

पंचतत्व और कमल पत्ता

‘हिमापन’ में कमल के पत्तों पर पंचतत्व की व्याख्या अत्यंत सुंदर ढंग से की गई है

  • वायु – अस्तित्व के प्राण कमल पत्तों की नसों में स्थापित हैं, मानो हर रेखा जीवन की श्वास हो।
  • पृथ्वी – कमल की जड़ मिट्टी में है; वही से उसे जीवन शक्ति प्राप्त होती है। यह हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है।
  • आकाश – कमल पात का रिक्त विस्तार वह स्थान है जहाँ कथा जन्म लेती है। यह शून्य ही सृजन का आधार है।
  • जल – कमल जल में पनपता है, पर उससे अछूता रहता है। पत्ते पर ठहरती जल-बूँद जीवन की निर्मलता का प्रतीक बन जाती है।
  • अग्नि – प्रकृति की ऊर्जा, सूर्य की तपिश और आंतरिक तेज से स्वयं को सींचता कमल, परिवर्तन और रूपांतरण का संकेत देता है।

कमल पत्ता : आध्यात्मिक प्रतीक

भारतीय परंपरा में कमल पवित्रता, वैराग्य और चेतना का प्रतीक है। कीचड़ में जन्म लेकर भी निर्मल बने रहना जीवन की सबसे बड़ी साधना है। कमल पत्ता हमें यह सिखाता है कि संसार के मध्य रहते हुए भी आंतरिक शुद्धता और संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

कमल पत्ते की सतह पर ठहरती जल-बूँदें हमें यह संदेश देती हैं कि जीवन के अनुभव आएँ, पर वे हमें बाँध न सकें। उसकी नसों का जाल मानो ब्रह्मांडीय ऊर्जा का मानचित्र है, जिसमें हर रेखा एक कथा कहती है।

हिमापन : मिथक और समकालीनता का संगम

‘हिमापन’ की प्रेरणा थाई पौराणिक हिमापन वन और कमल की पवित्रता से जुड़ी है। यह प्रदर्शनी आध्यात्म और समकालीन कला का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है। जैविक तत्वों को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाकर सपना महेश ने संभवतः राजस्थान में पहली बार ऐसा प्रयोग किया है, जहाँ प्रकृति स्वयं कैनवास बन गई है।

यह कला केवल देखने के लिए नहीं, अनुभव करने के लिए है। ‘हिमापन’ हमें प्रकृति के और निकट ले जाती है, यह याद दिलाती है कि सृजन बाहर नहीं, हमारे भीतर भी उतना ही जीवित है।

इस प्रदर्शनी को देखना एक कलात्मक यात्रा ही नहीं, बल्कि आत्मा के साथ एक शांत, गहरा और सजीव संवाद है।

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