

समाज अक्सर कहता है कि वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या हमारी विडंबना है। यह बात कहीं न कहीं सच भी है, क्योंकि हर वृद्ध को अपने ही घर में सम्मान और स्नेह मिलना चाहिए। परंतु वृद्धाश्रम समाज का एक और सच भी है, जिसे हम अक्सर देखने से चूक जाते हैं।
हाल ही में जोधपुर यात्रा के दौरान जोधाणा वृद्धाश्रम जाने का अवसर मिला। वहाँ के निवासियों से मिलकर एक गहरी आत्मीयता का अनुभव हुआ। उनकी आँखों में प्रतीक्षा थी, पर वह प्रतीक्षा केवल अपनों की नहीं, किसी अपने-से स्पर्श, किसी संवेदनशील संवाद की थी। उनके व्यक्तित्व में वर्षों का अनुभव झलक रहा था जीवन के उतार-चढ़ाव, संघर्ष और स्मृतियों की एक लंबी यात्रा। वृद्धाश्रम केवल एक इमारत नहीं होता; वह उन लोगों के लिए घर बन जाता है, जिन्हें अपने ही घर में जगह नहीं मिली या जिनकी परिस्थितियाँ उन्हें वहाँ तक ले आईं। यहाँ उन्हें नियमित देखभाल मिलती है, समय पर भोजन, दवाइयाँ और सबसे महत्वपूर्ण अपने हमउम्र साथियों का साथ। जीवन के इस पड़ाव पर जब बातचीत करने वाला कोई हमसफ़र मिल जाए, तो मन का बोझ सचमुच हल्का हो जाता है।
जब भी मैं किसी वृद्धाश्रम जाती हूँ, तो मन में यही विचार आता है कि जीवन की आदर्श स्थिति तो यही है कि हर माँ-बाप अपने परिवार के बीच रहें। पर जब ऐसा संभव नहीं हो पाता, तब वृद्धाश्रम उनके लिए सहारा बनते हैं एक सुरक्षित छत, एक संवेदनशील वातावरण और एक ऐसा परिवार, जो रक्त संबंधों से नहीं, बल्कि परिस्थितियों और संवेदनाओं से जुड़ा होता है। वृद्धाश्रम दया का स्थान नहीं, सम्मान का स्थान है। वहाँ रहने वाले लोग बोझ नहीं, बल्कि अनुभव की चलती-फिरती किताबें हैं जिनसे समाज को सीखने की आवश्यकता है।
जोधाणा जन कल्याण सेवा समिति, महामंदिर, जोधपुर द्वारा संचालित जोधाणा वृद्धाश्रम उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए समर्पित है, जो सामाजिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उपेक्षा, असम्मान, अवहेलना का सामना कर रहे हैं। यह आश्रम ऐसे सभी वृद्धजनों को स्वस्थ, प्रसन्नचित्त और गरिमामय जीवन प्रदान करने के उद्देश्य से निरंतर प्रयासरत है, ताकि वे अपने जीवन के उत्तरार्ध को सम्मान और संतोष के साथ जी सकें।
आश्रम में वातानुकूलित आवास की सुविधा उपलब्ध है। यहाँ सुपाच्य एवं पौष्टिक अल्पाहार, संतुलित भोजन, दूध तथा नियमित चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। मनोरंजन और मानसिक संतुलन के लिए टेलीविजन, धार्मिक पुस्तकें, पत्र-पत्रिकाएँ, योग-प्राणायाम, जिम और इंडोर गेम्स की व्यवस्था है। आश्रम परिसर में सुंदर उद्यान एवं मंदिर भी हैं, जहाँ निवासी शांति और आध्यात्मिक संतुलन का अनुभव करते हैं। दूरभाष सुविधा सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ भी उपलब्ध हैं। समय समय पर आश्रम में उत्सव मनाया जाता है जिससे उन्हें अपनत्व और सम्मान का भाव मिलता है मानो जीवन की संध्या में भी उत्सव की रोशनी बनी रहती है।
जोधाणा वृद्धाश्रम की स्थापना के पीछे मुख्य उद्देश्य उन सभी वरिष्ठ नागरिकों की सेवा करना है, जो पारिवारिक, आर्थिक या सामाजिक कारणों से अकेले जीवन जीने को विवश हैं और तिरस्कारपूर्ण या एकाकी जीवन का अनुभव कर रहे हैं। गरीबी, अलगाव और बुजुर्गों की उपेक्षा के विरुद्ध यह सतत संघर्ष अभी लंबा है। अब तक जो भी प्रगति हुई है, वह सागर में एक बूंद के समान है; फिर भी सेवा का यह संकल्प अडिग है। इस आश्रम का ध्येय केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को अपने जीवन का पुनर्निर्माण करने, अपने भविष्य की बागडोर स्वयं संभालने और उनके भीतर आत्म-मूल्य एवं आत्मविश्वास की भावना को पुनर्स्थापित करने में सहयोग देना है।
हम सभी भी इस सेवा-यज्ञ के सहयात्री बन सकते हैं। सेवा का हाथ बढ़ाकर हम अपने जीवन में सच्ची खुशी का अवसर खोज सकते हैं। अपने जन्मदिन, विवाह-वार्षिकी या किसी भी विशेष अवसर पर वहाँ जाकर समय बिताएँ, उनका आशीर्वाद लें और उन्हें यह एहसास कराएँ कि वे अकेले नहीं हैं। आप चाहें तो प्रतिदिन केवल एक रुपये से भी सहयोग की शुरुआत कर सकते हैं छोटी-सी पहल भी किसी के जीवन में बड़ा उजाला ला सकती है।
जोधाणा वृद्धाश्रम केवल एक निवास नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सम्मान का वह केंद्र है, जहाँ जीवन की संध्या बेला भी उजाले से भरी रह सके और जहाँ हर झुर्री में छिपी कहानी को सुनने वाला कोई अपना अवश्य मिले।


