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टाटा पावर और यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक की रणनीतिक साझेदारी नयी ऊर्जा प्रणालियों की खोज पर काम करेगी

भारत की दिग्गज ऊर्जा कंपनी टाटा पावर और यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य ग्रिड आधुनिकीकरण, फास्ट चार्जिंग, पावर स्टोरेज और औद्योगिक कार्बन- मुक्ति जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अत्याधुनिक रिसर्च और इनोवेशन को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। यह साझेदारी न केवल तकनीकी विकास, बल्कि उद्योगों की ज़रूरतों के अनुसार एग्जीक्यूटिव एजुकेशन और कौशल विकास कार्यक्रमों के नए द्वार खोलेगी।  इसके माध्यम से दोनों संस्थान साझा  कार्यशालाओं, केस स्टडी और एक्सचेंज कार्यक्रमों पर जोर देंगे, जो टाटा पावर की रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप वैश्विक शैक्षणिक जुड़ाव और लंबी अवधि की रिसर्च क्षमता को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

 यह समझौता यूनिवर्सिटी के दो बड़े विभागों—‘वारविक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप‘  (WMG) और ‘स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग‘ के दशकों पुराने अनुभव और महारत पर आधारित है।  साथ ही, यूनिवर्सिटी ने ऊर्जा प्रणालियों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का भी एलान किया है, जो इस साझेदारी को और मज़बूती देगा।

 यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के वाइस–चांसलर और प्रेसिडेंट, प्रोफेसर स्टुअर्ट क्रॉफ्ट ने कहा: “हम अपनी विश्व–स्तरीय रिसर्च और शिक्षा के जरिए दुनिया को और बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।   टाटा पावर के साथ हमारा यह तालमेल हमारी अकादमिक उत्कृष्टता और इंडस्ट्री के बड़े अनुभव को एक साथ लाता है, ताकि हम लोगों, समाज और पूरी धरती के लिए एक सुरक्षित और सस्टेनेबल भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकें।“

 यूनिवर्सिटी के पास ऊर्जा के हर क्षेत्र में रिसर्च का लंबा अनुभव है चाहे वह सेमीकंडक्टर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स हो या पूरी ऊर्जा प्रणालियाँ। इन सभी क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाकर और पावर सप्लाई पर ध्यान केंद्रित   करके, यूनिवर्सिटी टाटा पावर जैसे साझेदारों को ‘डीकार्बोनाइजेशन‘ में मदद करेगी।  इसमें जीवाश्म ईंधन की जगह बिजली का इस्तेमाल, ग्रिड में नए बदलाव और एडवांस पावर स्टोरेज जैसी तकनीकें शामिल होंगी।

 टाटा पावर के सीईओ और एमडी तथा डब्ल्यूएमजी में मानद प्रोफेसर, डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा: “टाटा पावर भारत में बिजली बनाने और इस्तेमाल करने के तरीके को बदलने के लिए पूरी तरह समर्पित है।   हमारा लक्ष्य 100 करोड़ लोगों के जीवन को सशक्त बनाना, उन तक ऐसी बिजली पहुँचाना है जो सस्ती हो, पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए और आधुनिक तकनीकों पर आधारित हो।  हम एक ऐसा भविष्य बना रहे हैं जहाँ ग्राहकों को कार्बन से मुक्ति एवं स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली मिले। यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक, जो ‘इलेक्ट्रिक पावर‘ और ‘पर्यावरण सुरक्षा‘ के क्षेत्र में दुनिया भर में मशहूर है, उसके साथ यह समझौता हमारे इन बड़े सपनों को जल्द पूरा करने में मदद करेगा।” 

  यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग स्कूल और डब्ल्यूएमजी में पहले से ही ऐसे रिसर्च प्रोग्राम चल रहे हैं जो पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं।  इनमें पुरानी चीजों को दोबारा इस्तेमाल  करना, बैटरी में नए सुधार, पवन ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उद्योगों से प्रदूषण कम करने जैसी तकनीकें शामिल हैं। ये कोशिशें भारत और दुनिया भर में कार्बन उत्सर्जन और खर्चों को कम करने के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर रही हैं।

 डब्ल्यूएमजी की डीन, प्रोफेसर केरी किरवान ने इस मौके पर कहा: “पिछले 45 वर्षों से डब्ल्यूएमजी का यही मकसद रहा है कि हम अपनी बेहतरीन रिसर्च का इस्तेमाल उद्योगों और समाज की भलाई के लिए करें।  टाटा ग्रुप के साथ हमारी मशहूर साझेदारी दशकों पुरानी है।  यह रिश्ता रिसर्च, शिक्षा और नई खोज के क्षेत्र में किए गए बड़े सहयोग पर टिका है।  यह देखकर बहुत खुशी होती है कि हमारी यह पुरानी विरासत आज भी दुनिया भर में सकारात्मक बदलाव ला रही है।“

 डब्ल्यूएमजी में इंडस्ट्रियल एंगेजमेंट के डायरेक्टर और सीईओ प्रोफेसर डेविड ग्रीनवुड ने अपनी बात जोड़ते हुए कहा: “भारत और विशेष रूप से टाटा के साथ हमारे रिसर्च संबंध हमेशा से हमारे लिए बहुत मूल्यवान रहे हैं।  अब जबकि यूके और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू हो चुका है, तो ऊर्जा, उद्योग और पर्यावरण से जुड़ी बड़ी चुनौतियों पर मिलकर काम करने का यह सबसे सही समय है।  साथ ही, यह रिसर्च, शिक्षा और आपसी सहयोग के नए अवसरों को तलाशने का भी बेहतरीन मौका है।“

 उद्योगों से कार्बन कम करने के लिए पूरे सिस्टम को एक साथ समझना (Systems-level  thinking) बहुत ज़रूरी है, ताकि यह काम कम खर्च में और सही तरीके से हो सके। डब्ल्यूएमजी के पास इसमें महारत हासिल है—वे बंदरगाहों और हवाई अड्डों जैसे बड़े संस्थानों के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि उन्हें निवेश और मुनाफे का सही रास्ता दिखाया जा सके।  वहीं, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग भविष्य की बिजली प्रणालियों के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस‘ और ‘एडवांस्ड कंट्रोल‘ जैसी तकनीकों पर ध्यान दे रहा है, ताकि ऊर्जा के इस बदलाव को सफल बनाया जा सके। 

 यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के प्रमुख, प्रोफेसर डेविड टावर्स ने कहा: “हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाली मॉडलिंग और कंट्रोल तकनीकों का इस्तेमाल कर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो ऊर्जा प्रणालियों को अधिक स्थिर, सुरक्षित और कुशल बनाते हैं। हमारी रिसर्च राष्ट्रीय और क्षेत्रीय ग्रिड से लेकर छोटे माइक्रो– ग्रिड तक फैली हुई है, जिसमें हम पवन ऊर्जा, बिजली स्टोरेज और हाइड्रोजन जैसी तकनीकों को एक साथ जोड़ रहे हैं।  हम टाटा पावर के साथ मिलकर इन क्षमताओं को बड़े पैमाने पर लागू करने और उद्योगों से प्रदूषण कम करने के व्यावहारिक रास्ते बनाने के लिए उत्साहित हैं।“

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