EDUCATIONHINDILIFESTYLENATIONAL

सशक्त महिला: सशक्त भारत ( ARTICLE )

विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए महिलाओं का शिक्षित, सशक्त, एवं सामर्थ्य वान होना अनिवार्य है। स्वामी विवेकानंद का यह मानना था कि जो राष्ट महिलाओं का सम्मान नहीं कर सकता, वो कभी भी महान राष्ट्र नहीं बन सकता। महिलाएँ समान अधिकारों एवं अवसरों के लिए लंबे समय से संघर्षरत रही है और आज भी समानता एवं न्याय के उस दौर मे नहीं पहुंच पाई जिसकी वो हक़दार है। यद्यपि वर्तमान दौर मे जीवन के सभी क्षेत्रों मे महिलाएँ प्रगति के पथ पर अग्रसर है लेकिन समाज की संकीर्ण मानसिकता, दकियानूसी परंपराएं, संरचनात्मक बाधा ऐ ,पितृसत्तात्मक व्यवस्थाएं उन्हें प्रत्येक कदम पर नवीन चुनौतियां प्रस्तुत कर रही हैं । विश्व आर्थिक मंच की वैश्विक लैंगिक असमानता रिपोर्ट 2025 में भारत 148 देशों में से 131 वे स्थान पर है जो पिछले वर्ष की तुलना मे दो पायदान नीचे चला गया है l 18 वी लोकसभा मे महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व 13.6% ही है और राज्यसभा मे तो 13% ही है जो संतोषजनक नहीं है l राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार (2022) महिलाओं के प्रति अपराध में पिछले वर्ष की तुलना मे 4% की वृद्धि हुई है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार जेंडर पे गेप भारत मे 27%(2023) है ।

ये कुछ आंकडे है जबकि जमीनी स्तर पर हालत आज भी भयावह है ।व्यवस्थागत भेदभाव, महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों ने 21 वी सदी में भी महिलाओं को व्यावसायिक एवं आधुनिक शिक्षा से वंचित कर रखा है। बाल विवाह, दहेज हत्या, कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियां महिलाओं की प्रगति में बाधक है । काम एवं परिवार की दोहरी जिम्मेदारी उन्हे मानसिक रूप से बीमार बना रही है। घरेलू हिंसा एवं महिलाओं के प्रति अपराधों में वृद्धि तो आज की उपभोक्ता वादी संस्कृति में समान्य घटनायें बन गई है। महिला समानता एवं सशक्तिकरण हेतु परिवार, समाज, विभिन्न समुदायों, गैर सरकारी संस्थाओं, प्रबुद्ध जनों, महिलाओं एवं सरकारों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। आज समय की मांग है कि लिंग समानता उन्मुख नीति निर्धारण के साथ ही महिला विरोधी संकीर्ण मानसिकता को जड़ से समाप्त करने हेतु निरंतर सामाजिक जागरूकता एवं चेतना का निर्माण करना होगा। लिंग सम्वेदनशील नीति निर्माण एक सामाजिक एवं आर्थिक आवश्यकता है। शैक्षणिक क्षेत्र में ल़डकियों के लिए समान अवसर एवं मित्रवत माहौल निर्मित करना होगा।

महिलाओं के लिए सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण निर्मित करना होगा ताकि उनकी सामाजिक गति शीलता में वृद्धि हो सके। विधायी निकायों में महिलाओं का 33% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने की आवश्यकता है। भारत वह देश है जहाँ अर्द्धनारीश्वर की अवधारणा प्रचलित रही है जो महिला समानता एवं सशक्तिकरण का बेजोड़ उदाहरण है, आज भारतीय समाज के इस आधारभूत विश्वास एवं मूल्य को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है।

 

 

 

 

– डॉ उषा राठौड़
सहायक आचार्य ( राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग )
अलंकार महिला महाविद्यालय, जयपुर .

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *