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समाज, न्याय और संवेदना के सवालों के बीच अंशु हर्ष की नयी पुस्तक “इच्छा मृत्यु” पर चर्चा

जयपुर। World of Words Book Club की ओर से वरिष्ठ लेखिका और पत्रकार अंशु हर्ष की चर्चित पुस्तक “इच्छा मृत्यु” पर एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में पुस्तक के विभिन्न आयामों, उसके सामाजिक संदर्भ और लेखन प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में प्रश्न डॉ. लवेश पांडेय ने पूछे, जिनका उत्तर लेखिका अंशु हर्ष ने संवेदनशीलता और स्पष्टता के साथ दिया।

संवाद की शुरुआत में अंशु हर्ष ने कहा कि वे मूलतः प्रेम के विभिन्न रूपों पर लिखती रही हैं। उनके शब्दों में — “मैं प्रेम में हूँ या प्रेम मुझमें है, यह कहना कठिन है। प्रेम के कई रूप होते हैं, और जब संवेदनाएँ जन्म लेती हैं तो मेरे जैसे संवेदनशील व्यक्ति के हृदय में कई सवाल और उनके जवाब भी जन्म लेते हैं। ‘इच्छा मृत्यु’ उसी तरह के सवालों के जवाब खोजने की एक कोशिश है।”

पुस्तक के विषय पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़े कुछ असहज और कड़वे सवालों को सामने रखने का प्रयास है। उन्होंने यह प्रश्न भी उठाया कि क्या हर बलात्कार की घटना के बाद केवल कैंडल मार्च निकाल लेना और नारे लगा देना ही पर्याप्त है, या हमें समाज की गहरी मानसिकता और व्यवस्था पर भी विचार करना चाहिए।

पुस्तक के शीर्षक “इच्छा मृत्यु” के बारे में उन्होंने बताया कि इस वास्तविक घटना के कारण ही देश में इच्छा मृत्यु (Euthanasia) के कानून पर गंभीर चर्चा शुरू हुई और उसी ने आगे चलकर इस विषय की आधारशिला रखी। अंशु हर्ष ने यह भी कहा कि इस नॉवल का एक पहलू यह भी है कि इसकी नायिका ने जिस तरह का जीवन जिया, उस पीड़ा और परिस्थितियों को देखते हुए कई बार मृत्यु ही उसके लिए एक बेहतर मुक्ति प्रतीत होती है।

इस अवसर पर World of Words Book Club के बारे में भी जानकारी दी गई। यह बुक क्लब हर शनिवार को नियमित रूप से पुस्तक चर्चा का आयोजन करता है, जिसमें हर सप्ताह विभिन्न विषयों और पुस्तकों पर संवाद किया जाता है। इस बुक क्लब की संस्थापक आशिमा चौधरी और अंशु हर्ष हैं, जिनका उद्देश्य साहित्य के माध्यम से समाज में विचार-विमर्श और संवेदनशील संवाद की परंपरा को मजबूत करना है।

संवाद के दौरान पुस्तक के शोध, लेखन प्रक्रिया, सामाजिक दृष्टिकोण और न्याय व्यवस्था से जुड़े कई प्रश्नों पर भी चर्चा हुई। उपस्थित पाठकों और साहित्यप्रेमियों ने भी इस गंभीर विषय पर अपने विचार साझा किए। यह सत्र केवल एक पुस्तक चर्चा नहीं रहा, बल्कि समाज, संवेदना और मानवीय गरिमा जैसे विषयों पर गहन चिंतन का अवसर भी बना। World of Words Book Club की इस पहल को उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने सराहा और ऐसे संवादों को समाज के लिए आवश्यक बताया।

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