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अखिल भारतीय साहित्य परिषद् ,जयपुर विभाग के तत्वावधान में हुई परिचर्चा

विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के जयपुर विभाग की ओर से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर कृति ‘ आनंद मठ ‘ पर परिचर्चा का आयोजन हुआ। कॉन्स्टीट्यूशन क्लब जयपुर के मंथन सभागार में हुई इस परिचर्चा में बड़ी संख्या में प्रदेशभर से आए हुए शिक्षाविद्,पत्रकार और रचनाकार एकत्र हुए। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के प्रदेश महामंत्री डॉ केशव शर्मा ने बताया कि इस परिचर्चा में हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय जयपुर के कुलगुरु प्रो. नन्द किशोर पांडेय, राजस्थान साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ इंदुशेखर तत्पुरुष और शिक्षाविद् डॉ जितेंद्र कुमार सिंह ने आनंद मठ उपन्यास के विभिन्न पक्षों पर विचार प्रकट किए।

कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती के छवि चित्र पर पुष्प अर्पण से हुई। तत्पश्चात रवि पारीक द्वारा परिषद् गीत प्रस्तुत किया गया। डॉ जितेंद्र कुमार सिंह ने आनंद मठ उपन्यास में सामाजिक यथार्थ पर बोलते हुए कहा कि इस उपन्यास में बंगाल के भयंकर अकाल का वर्णन है,जिसमें तत्कालीन क्रूर शासक मीरजाफर के अत्याचार से उत्पन्न हुए व्यापक सन्यासी आंदोलन की पृष्ठभूमि इस कृति में जीवंत हुई है। इसमें जातिगत भेदभाव को भूलकर मातृभूमि के रक्षार्थ सभी सन्यासी लड़े थे। डॉ इंदुशेखर तत्पुरुष ने आनंद मठ उपन्यास में राष्ट्रीय चेतना पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि इस कृति में वर्णित संतान धर्म महाव्रत और सन्यासी आन्दोलन की विजय के पश्चात निर्मित शासन तंत्र से प्रजातांत्रिक राज्य की संकल्पना हुई है । प्रो नंद किशोर पांडेय ने सन्यासी विद्रोह का संदर्भ और वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भ पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि सन्यासी आंदोलन में महिलाओं को शस्त्र संचालन की शिक्षा दी जाती थी,इससे स्पष्ट होता है कि सन्यासी आंदोलन में मातृ शक्ति का योगदान सक्रिय रूप से था। इसमें वर्णित वैष्णव धर्म को हिंदू मुस्लिम के सांप्रदायिक भेद के रूप में न देखकर पूरे देश की राष्ट्रीय एकता के लिए हुए संघर्ष की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। प्रमुख वक्ताओं के व्याख्यान के बाद सत्र को सदन में स्वतंत्र संवाद के लिए रखा गया जिसमें सुधि श्रोताओं के आनंद मठ उपन्यास से संबंधित कई जिज्ञासाओं और प्रश्नों का उत्तर अतिथि वक्ताओं द्वारा दिया गया। कार्यक्रम के अंत में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के प्रदेश महामंत्री डॉ केशव शर्मा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस परिचर्चा का संयोजन और संचालन डॉ रेवंत दान ने किया।

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