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ब्रिज बिल्डर : डॉ. पूर्णिमा वोरिया और बदलती वैश्विक साझेदारी

डॉ. पूर्णिमा वोरिया आज के वैश्विक परिदृश्य में एक ऐसी दूरदर्शी व्यक्तित्व के रूप में उभरती हैं, जिन्होंने देशों, बाजारों और विचारों के बीच सार्थक संवाद और सहयोग के नए आयाम स्थापित किए हैं। एक इमिग्रेंट से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली रणनीतिकार बनने तक की उनकी यात्रा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि अमेरिका और भारत के संबंधों को सशक्त करने की एक प्रेरक कहानी है। National U.S.-India Chamber of Commerce (NUICC) की संस्थापक और CEO के रूप में, वे व्यापार, तकनीक और कूटनीति के संगम पर खड़ी होकर भविष्य की दिशा तय कर रही हैं जहाँ विविधता शक्ति बनती है और सहयोग प्रगति का आधार। राजस्थान फाउंडेशन की प्रवासी कोऑर्डिनेटर लेखक सम्पादक और पत्रकार अंशु हर्ष ने बात की राजस्थान फॉउंडेशन के न्यूयोर्क चैप्टर की अध्यक्ष डॉ पूर्णिमा वोरिया से –

प्रश्न -. एक भारतीय मूल की महिला होकर अमेरिका में इतना बड़ा मुकाम हासिल करना इस सफर में सबसे बड़ी चुनौतियां क्या रहीं?

डॉ पूर्णिमा – मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी पहचान को बनाए रखना थी एक ऐसे वातावरण में जहाँ आपको बार-बार खुद को साबित करना पड़ता है। एक इमिग्रेंट, एक महिला और एक एशियाई होने के नाते मुझे कई बार कम आंका गया। लेकिन मैंने इसे कभी बाधा नहीं बनने दिया। मैंने हमेशा यह माना है कि विविधता कोई सीमा नहीं है यह एक रणनीतिक शक्ति है, और यही सोच मेरी ताकत बनी।

प्रश्न – आपकी इस प्रेरणादायक यात्रा की शुरुआत कहाँ से हुई? किस मोड़ ने आपके जीवन की दिशा तय की?

डॉ पूर्णिमा – मेरी यात्रा भारत से शुरू हुई, जहाँ मैंने सबसे पहले सपने देखना सीखा। लेकिन मेरे जीवन का असली मोड़ तब आया जब मुझे यह एहसास हुआ कि मैं केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दो देशों भारत और अमेरिका के बीच एक पुल बन सकती हूँ। उसी क्षण से मेरे हर निर्णय की दिशा तय हो गई।

प्रश्न – National U.S.-India Chamber of Commerce (NUICC) की स्थापना के पीछे आपकी क्या सोच और उद्देश्य था? और इसकी भविष्य की दिशा क्या है?

डॉ पूर्णिमा – जब मैंने NUICC की स्थापना की, मेरा उद्देश्य सिर्फ एक नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म बनाना नहीं था, बल्कि एक ऐसा मंच तैयार करना था जो नेशन बिल्डिंग में योगदान दे सके। मेरा फोकस अमेरिका भारत ट्रेड को मजबूत करना, SMEs और व्यापारियों को ग्लोबल प्लेटफार्म देना और डिफेंस, एयरोस्पेस और क्वांटम जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना मेरा उद्देश्य रहा है। भविष्य में, मैं NUICC को एक वैश्विक नीति और निवेश को आगे बढ़ाने वाले माध्यम के रूप में देखती हूँ, जो प्रौद्योगिकी नेतृत्व और आर्थिक कूटनीति को दिशा देगा।

प्रश्न – आपने ओबामा और बुश प्रशासन के साथ काम किया—इस अनुभव ने आपको क्या सिखाया?

डॉ पूर्णिमा – बराक ओबामा और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के प्रशासन के साथ काम करने का अनुभव मेरे लिए अत्यंत शिक्षाप्रद रहा। मैंने सीखा कि नीतियाँ महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन लोग उससे भी अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। नेतृत्व का अर्थ है कठिन निर्णय लेने की क्षमता, और स्थायी प्रगति के लिए द्विपक्षीय सहयोग बहुत आवश्यक है। मेरे लिए सबसे बड़ी सीख यह रही कि वैश्विक संबंध लेन-देन पर नहीं, बल्कि विश्वास पर आधारित होते हैं।

प्रश्न . वैश्विक स्तर पर भारत की छवि और NRIs की भूमिका को आप कैसे देखती हैं?

डॉ पूर्णिमा – आज भारत एक पुनः उभरती हुई वैश्विक शक्ति है, जिसकी ताकत नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और जनसांख्यिकीय शक्ति में निहित है। एनआरआई इस कहानी के वैश्विक प्रतिनिधि हैं। वे केवल धनराशि ही नहीं भेजते, बल्कि प्रतिष्ठा, संबंध और संसाधन भी साथ लेकर आते हैं। मैंने अपने अनुभव से सीखा है कि भारत में अवसर असीम हैं, लेकिन सफलता उन्हीं को मिलती है जो इसकी जटिलताओं को धैर्य और सम्मान के साथ समझते हैं।

प्रश्न -आपकी पुस्तक Falling in Love with India लिखने की प्रेरणा क्या थी?

डॉ पूर्णिमा – Falling in Love with India में मेरा योगदान एक भावनात्मक और अनुभवात्मक यात्रा है। मैं दुनिया को यह बताना चाहती थी कि भारत केवल एक बाज़ार नहीं है यह एक सभ्यता, एक सोच और एक भावना है। यह पुस्तक मेरे लिए भारत से जुड़े मेरे गहरे संबंध और मेरे वैश्विक दृष्टिकोण का संगम है।

प्रश्न – आने वाले समय में आपके प्रमुख लक्ष्य और प्रोजेक्ट्स क्या हैं?

डॉ पूर्णिमा – मेरा फोकस अमेरिका–भारत के रणनीतिक व्यापार विस्तार पर है, साथ ही रक्षा, एयरोस्पेस और क्वांटम इकोसिस्टम को जोड़ने पर भी। मैं “इंडिया एडवांटेज प्रोग्राम” को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना चाहती हूँ और युवा नेतृत्व तथा महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि नीति, व्यापार और नवाचार को साथ लाकर ही हम भविष्य को दिशा दे सकते हैं।

प्रश्न – यदि आपको एक वाक्य में अपने जीवन के उद्देश्य को परिभाषित करना हो?

मेरा उद्देश्य है देशों, लोगों और विचारों के बीच ऐसे पुल बनाना, जो अवसर, शांति और प्रगति को आगे बढ़ाएँ।

  • अंशु हर्ष

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