
राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में पहली बार आयोजित इस फेस्टिवल को जयपुर नगर निगम ग्रेटर की पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर ने मुख्य अतिथि के रूप में फेस्ट का उद्घाटन किया, जबकि डीएसपी अंजू यादव विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहीं। उद्घाटन समारोह में कैम्ब्रिज कोर्ट वर्ल्ड स्कूल के स्टूडेंट्स ने कैफे ऑनर्स को समर्पित आकर्षक नाट्य प्रस्तुति दी, जिसमें युवाओं द्वारा नौकरी छोड़कर कैफे स्टार्टअप शुरू करने और सफलता पाने की प्रेरक कहानियां प्रस्तुत की गईं। प्रथम दिन विभिन्न विषयों पर लाइव टॉक सेशन आयोजित हुए। ‘चाय और राजनीति’ विषय पर आयोजित सत्र में भाजपा प्रवक्ता डॉ. मनीषा सिंह, पीसीसी राजस्थान की सचिव डॉ. मीनाक्षी सेठी जैदी और शिवसेना के मुख्य सचिव कुशाल सिंह राठौड़ ने अपने विचार रखे। सत्र का संचालन एजुकेशनिस्ट डॉ. टीना साहने ने किया। ‘सिनेमा और चाय: फ्लेवर्स ऑफ फ्रेम्स’ विषय पर आयोजित टॉक शो में लेखक व थिएटर आर्टिस्ट अशोक राही और लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ ने चर्चा की। इस सत्र का संचालन रेडियो शो प्रोड्यूसर सुषमा नरूला ने किया। ‘चाय और इमोशन’ थीम पर आयोजित चाय कवि सम्मेलन फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें कवियों ने भावपूर्ण प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
फेस्टिवल के दौरान आर्टिस्ट संत कुमार बिश्नोई ने चाय के माध्यम से लाइव पेंटिंग बनाकर दर्शकों को आकर्षित किया। वहीं, प्रतिष्ठित चाय ब्रांड्स द्वारा विजिटर्स को निशुल्क चाय का स्वाद चखने का अवसर मिला और स्टार्टअप स्टॉल्स पर लोगों ने चाय व कैफे से जुड़ी नई जानकारियां प्राप्त कीं। लीला इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के स्टूडेंट्स ने फैशन शो के जरिए चाय और उससे जुड़ी भावनाओं को रैंप पर जीवंत किया। चाय व क्रॉकरी थीम पर आधारित इस शो में सस्टेनेबिलिटी, डॉयबल क्लॉथ और ब्रोकन क्रॉकरी का अनूठा प्रदर्शन किया गया। अंतिम दिन ‘टॉक्सिक से टॉनिक तक’ विषय पर आयोजित सत्र में वरिष्ठ पत्रकार मुकेश माथुर, फर्स्ट इंडिया ग्रुप के डायरेक्टर वीरेन्द्र चौधरी और माय एफएम के आरजे कार्तिक ने चर्चा की। सत्र का संचालन फिक्की फ्लो की पूर्व चेयरपर्सन रघुश्री पोद्दार ने किया। वीरेन्द्र चौधरी ने अमेरिका की बोस्टन टी पार्टी का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे चाय एक बड़े आंदोलन का कारण बनी। मुकेश माथुर ने कहा कि चाय में अपार क्रिएटिविटी और ऊर्जा होती है, जबकि आरजे कार्तिक ने कहा कि रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए आज के इमोजी युग से आगे बढ़कर लोगों को चाय पर मिलना जरूरी है।



