महाभारत के हनुमान है – पांडुपोल हनुमान

बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास जब पांडव भोग रहे थे तब थोड़ा समय उन्होंने राजस्थान की इस अरावली पर्वत श्रृंखला पर भी व्यतीत किया था। अज्ञातवास के दौरान जब पांडव विराटनगर जा रहे थे तो उनके रास्ते में एक विशाल पहाड़ आ गया था तब महाबली भीम ने अपनी गदा के एक ही प्रहार से पहाड़ को तोड़कर आर-पार रास्ता बना दिया था इसी रास्ते को ‘पोल’ (दरवाजा ) पांडुपोल कहा जाता है। साथ ही यहाँ से एक जलधारा प्रस्फुटित हुई जो आज भी झरने के रूप में वहाँ बह रही है। भीम को पर्वत में पोल बनाने का अभिमान हो गया था।
सरिस्का का क्षेत्र हरे-भरे जंगलों से होकर गुजरने वालों के लिए मनोरम ट्रेकिंग मार्गों के लिए भी जाना जाता है। यह मंदिर एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक तीर्थस्थल और एक लोकप्रिय ट्रेकिंग स्थल है, जो हर साल सैकड़ों श्रद्धालुओं, रोमांच के शौकीनों और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करता है।
अपने आध्यात्मिक महत्व के अलावा, यह मंदिर दर्शनीय स्थलों का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है, जहाँ पर्यटक राजस्थान के वन्य जीवन के आकर्षण का अनुभव कर सकते हैं, स्थानीय जंगली जानवरों को देख सकते हैं और शानदार नज़ारों का आनंद ले सकते हैं। यह क्षेत्र अलवर जिले के थानागाजी तहसील के अंतर्गत आता है। दिल्ली से 165 किलोमीटर और जयपुर से 110 किलोमीटर दूर, स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर अलवर से होकर जा सकते है। सरिस्का के गेट से मंदिर की दुरी 18 किलोमीटर है और जाने में लगभग 50 मिनिट का समय लग जाता है। हर दिन यह मंदिर सुबह पांच बजे से शाम छ बजे तक खुला रहता है लेकिन निजी वाहन सिर्फ मंगलवार और शनिवार को यहाँ जा सकते है, दोनों दिनों में निजी वाहनों के प्रवेश का समय सुबह 8:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक निर्धारित है। इन दोनों दिनों में अलवर जिले के नंबर वाली गाड़ियों पर कोई शुल्क नहीं लगता। दूसरी प्राइवेट गाड़ियों पर एक निर्धारित शुल्क देना होता है। इसके अलावा वहां के वाहन ले कर आप अंदर जा सकते है।
आप भगवान हनुमान के भक्त हों, इतिहास के शौकीन हों या फिर एक अनोखे यात्रा अनुभव की तलाश में हों तो ये जगह आपको बहुत आकर्षित करती है। सरिस्का (सरिस्का टाइगर रिजर्व) मुख्य रूप से अपने रॉयल बंगाल टाइगर्स के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ तेंदुए, सांभर, नीलगाय, चिंकारा, लकड़बग्घे और जंगली सूअर जैसे कई जानवर पाए जाते हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए यह बेहतरीन जगह है, जहाँ 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षी (जैसे मोर, तीतर, और कलगीदार चील) देखे जा सकते है। सरिस्का टाइगर रिजर्व प्रतिदिन दो सफारी शिफ्टों (सुबह और शाम) के लिए खुला रहता है। समय मौसम के अनुसार थोड़ा बदलता रहता है, लेकिन आमतौर पर पार्क सुबह 6:00 बजे से 10:00 बजे तक और दोपहर 2:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक खुला रहता है । मुख्य रिजर्व बुधवार को और मानसून के मौसम (जुलाई से सितंबर) के दौरान पर्यटकों के लिए बंद रहता है।
यहाँ पहुँचने पर आप बाहरी दुनिया से दूर हो जाते हो क्योंकि ,इंटरनेट फ़ोन किसी तरह की कोई कनेक्टिविटी वहां नहीं है। यहाँ हर साल भाद्रपद (भादौ) शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन विशाल मेला भरता है, जिसमें देश भर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के महंत श्री बाबू लाल शर्मा जी बताते है कि उनकी पांचवी पीढ़ी इस मंदिर की सेवा कर रही है और आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
- अंशु हर्ष



