JIG (जयपुर इंटेलेक्चुअल ग्रुप) के सीज़न 3 की तीसरी बैठक का आयोजन किया गया

JIG (जयपुर इंटेलेक्चुअल ग्रुप) के सीज़न 3 की तीसरी बैठक का मुख्य विषय था: “कल्पना से यथार्थ तक: कला की यात्रा”, जिसमें कला की विविध विधाओं में कल्पनाशक्ति की भूमिका और उसकी यथार्थ में अभिव्यक्ति पर विचार प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम की मेज़बान अंशु हर्ष थी. उन्होंने स्वागत भाषण के साथ विषय की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की और पूरे सत्र का संयोजन आत्मीयता व संतुलन के साथ किया। सपना महेश ने “डिजिटल कल्पना” पर विचार साझा करते हुए बताया कि आधुनिक युग में डिजिटल माध्यम कलाकारों की कल्पना को नए आयाम दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैसे तकनीक ने कला को वैश्विक मंच पर पहुंचाया है और रचनात्मक अभिव्यक्ति को पहले से अधिक सशक्त बना दिया है। सुधीर गुप्ता ने “पाक कला” पर वक्तव्य देते हुए कहा कि भोजन बनाना भी एक कला है, जिसमें स्वाद, सौंदर्य और कल्पना का अद्भुत संगम होता है। उन्होंने समझाया कि कैसे एक रसोइया अपनी कल्पनाशीलता से साधारण सामग्री को असाधारण अनुभव में बदल देता है। अशोक राही ने “नाट्य कला” पर अपने विचार रखते हुए बताया कि रंगमंच वह माध्यम है जहाँ कल्पना को जीवंत रूप में मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि अभिनय, संवाद और भाव-भंगिमा के माध्यम से कल्पना दर्शकों के मन में यथार्थ की तरह उतरती है। चर्चा में यह निष्कर्ष निकला कि कला के हर रूप में कल्पना की उपस्थिति अनिवार्य है, वह न केवल रचना को जन्म देती है, बल्कि दर्शकों को उससे जोड़ने की शक्ति भी रखती है।
सत्र के अंत में प्रश्नोत्तर और विचार-विमर्श का दौर चला, जिसमें उपस्थित सदस्यों ने विषय से संबंधित विचारों और अनुभवों को साझा किया। बैठक में उपस्थित सदस्य थे: अल्का बत्रा, रानू श्रीवास्तव, प्रेरणा, त्रिप्ती पांडे, कमला पोद्दार, सुधीर माथुर, सपना महेश, अशोक राही, मीता सिंह, निर्मला सेवानी, सुधीर कासलीवाल देवराज सिंह, विद्या जैन, सुधीर गुप्ता, सरिता सिंह, रजुला लूना, टीना साहनी, शशि माथुर।


