
एक दुखद घटना में 43 वर्षीया सुमित्रा देवी की दुर्घटना में गंभीर चोट लगने से मृत्यु हो गई। उन्हें NIMS अस्पताल लाया गया, जो अपनी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं और नवीनतम तकनीक के लिए जाना जाता है। NIMS अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सुमित्रा देवी को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस कठिन समय में, उनके परिवार ने एक साहसी और निःस्वार्थ निर्णय लेते हुए सुमित्रा देवी के अंगों का दान किया। सुमित्रा देवी के अंगदान से चार लोगों को नया जीवन मिल सका। यह महान कार्य न केवल उनके परिवार की उदारता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि दुःख की घड़ी में भी हम दूसरों के लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं।
NIMS अस्पताल के चेयरमैन डॉ. बलवीर सिंह तोमर जी ने इस अंगदान की सराहना की और कहा, “हम इस तरह के कार्यों को प्रमोट करेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके। हम ट्रांसप्लांट टीम की कड़ी मेहनत और समर्पण की सराहना करते हैं। डॉ. तोमर जी के नेतृत्व में NIMS अस्पताल ने कई मील के पत्थर हासिल किए हैं और अंगदान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”
डॉ. बलवीर सिंह तोमर जी ने बताया कि राजस्थान सरकार ने अंगदान को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने ग्रीन कार्पेट कॉरिडोर तैयार किया है, जिससे अंगदान की प्रक्रिया को और भी सुविधाजनक बनाया जा सके। जयपुर पुलिस प्रशासन और राजस्थान स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हम सुमित्रा देवी के परिवार को उनके इस निःस्वार्थ कार्य के लिए दिल से धन्यवाद और सम्मान प्रकट करते हैं। उनका यह योगदान निश्चित रूप से दूसरों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत होगा।
NIMS अस्पताल की टीम:
– प्रो.(डॉ) दीपक तिवाड़ी – मेडिकल सुप्रीटेंडेंट एवं एनेस्थीसिया डायरेक्टर
– प्रो.(डॉ) सौरभ भार्गव – डायरेक्टर न्यूरोएनेसथीसिया एवं न्यूरो क्रिटिकल केयर
– Mr. Lovekush – ओटी मैनेजर


