HINDILIFESTYLELITERATURENATIONALPOLITICAL

डॉ. सतीश पूनियाँ की विचार यात्रा है यह पुस्तक – समीक्षा – अंशु हर्ष 

 

 

डॉ सतीश पूनियाँ जी द्वारा लिखित पुस्तक “अग्निपथ नहीं, जनपथ” भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा की उस गंभीर और उत्तरदायी भावना का सशक्त दस्तावेज़ है, जो सत्ता से अधिक समाज को केंद्र में रखती है। यह पुस्तक केवल उनके अनुभवों का संकलन नहीं, बल्कि एक जनप्रतिनिधि की वैचारिक यात्रा, उसकी कार्यशैली और लोकतंत्र के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है।

भारत का लोकतंत्र केवल संविधान की देन नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपरा में सदियों से रचा-बसा है। वैदिक सभाओं से लेकर गणराज्यों तक, संवाद और सहभागिता की परंपरा हमारे सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। इसी परंपरा का आधुनिक स्वरूप है विधानसभा, जहाँ जनता के चुने हुए प्रतिनिधि समाज की आकांक्षाओं को स्वर देते हैं। यह मात्र एक राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि वह पवित्र स्थान है जहाँ से शासन की दिशा और जनता का भविष्य तय होता है। इसलिए किसी विधायक का कार्य केवल अपने क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके हर वक्तव्य और हस्तक्षेप का प्रभाव संपूर्ण समाज पर पड़ता है।

डॉ. सतीश पूनियाँ ने अपने विधायक कार्यकाल के भाषणों और हस्तक्षेपों को पुस्तक रूप में प्रस्तुत कर एक सच्चे नेता की जिम्मेदारी का निर्वहन किया है। अनुभवों को लिखित रूप देना इसलिए आवश्यक है क्योंकि वे समय के साथ धुंधले नहीं पड़ते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन जाते हैं। अधिकांश जनप्रतिनिधि अपने अनुभवों को मौखिक चर्चाओं तक सीमित रखते हैं, परंतु उन्हें पुस्तक रूप में संरक्षित करना लोकतांत्रिक परंपरा को सुदृढ़ करने वाला अनुकरणीय प्रयास है। यह कार्य भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर के समान है।

वर्ष 2018 में आमेर से पहली बार विधायक चुने जाने के बाद सदन में उनकी उपस्थिति एक गंभीर और अध्ययनशील जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित हुई। उनकी शैली संयमित, तथ्याधारित और शोधपरक रही। वे किसी भी विषय पर बोलने से पहले गहन तैयारी करते थे और आँकड़ों के साथ सरकार से जवाब मांगते थे। चाहे विषय किसान हितों का हो, बेरोजगारी का, शिक्षा व्यवस्था का या कानून-व्यवस्था का उन्होंने हर मुद्दे पर स्पष्टता और दृढ़ता के साथ अपनी बात रखी। विशेष बात यह रही कि उनकी आलोचना कभी व्यक्तिगत नहीं हुई; वह सदैव रचनात्मक और समाधान की राह को खोजती हुई रही है। यही किसी विधायक की वास्तविक कसौटी है।

आज जब राजनीति में बहस के स्तर को लेकर चिंताएँ व्यक्त की जाती हैं, तब डॉ. पूनियाँ जैसे जनप्रतिनिधि लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखने का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। वे केवल विरोध के लिए विरोध करने में विश्वास नहीं रखते, बल्कि सार्थक संवाद और सकारात्मक सुझावों के माध्यम से व्यवस्था में सुधार का मार्ग प्रशस्त करते हैं। संगठनात्मक जीवन से आए होने के कारण उनमें सामूहिक नेतृत्व और अनुशासन की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने विधायक दल में लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन किया और धैर्य, संवाद तथा संतुलन का परिचय दिया।

“अग्निपथ नहीं, जनपथ” शीर्षक अपने आप में एक गहरा संदेश देता है। राजनीति की राह अनेक बार अग्निपथ के समान कठिन और संघर्षपूर्ण होती है, परंतु यदि लक्ष्य जनपथ अर्थात जनता का मार्ग हो, तो वही संघर्ष सार्थक बन जाता है। यह पुस्तक बताती है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो जनता की अपेक्षाओं को समझे, उनके प्रश्नों को स्वर दे और शासन को जवाबदेह बनाए।

यह कृति लोकतंत्र की आत्मा को समझने का अवसर देती है। इसमें एक विधायक की सोच, उसकी प्राथमिकताएँ, उसकी वैचारिक स्पष्टता और जनहित के प्रति उसका समर्पण झलकता है। युवा पीढ़ी, जो सार्वजनिक जीवन में आकर समाज परिवर्तन का सपना देखती है, उसके लिए यह पुस्तक मार्गदर्शक का कार्य कर सकती है। यह सिखाती है कि राजनीति केवल पद प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, अध्ययन, धैर्य और नैतिक साहस का क्षेत्र है।

इस पुस्तक की एक विशेषता यह भी है कि इसमें चित्रित कुछ कार्टून पाठक के चेहरे पर सहज मुस्कान ला देते हैं। गंभीर विषयों और तथ्यपूर्ण भाषणों के बीच ये कार्टून न केवल प्रस्तुति को रोचक बनाते हैं, बल्कि राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यंग्यात्मक दृष्टि भी प्रस्तुत करते हैं। इससे पुस्तक का स्वर केवल औपचारिक नहीं रहता, बल्कि संवादात्मक और मानवीय बन जाता है।

समग्र रूप से “अग्निपथ नहीं, जनपथ” लोकतांत्रिक मूल्यों, जनप्रतिबद्धता और उत्तरदायी नेतृत्व का प्रेरक दस्तावेज़ है। यह पुस्तक न केवल एक जनप्रतिनिधि के कार्यकाल को दर्ज करती है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उस जीवंत परंपरा को भी सशक्त करती है, जो संवाद, तर्क और जनसेवा पर आधारित है।

समीक्षा – अंशु हर्ष

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *