
मेज़बान नीलिमा टिक्कू ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए बैठक के विषय “प्रकृति और हम गहरे दोस्त हैं” का परिचय कराया। इस अवसर पर आयोजित चर्चा में मानव और प्रकृति के गहरे संबंध पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सदस्यों ने कहा कि प्रकृति हमारे जीवन का आधार है और इसके साथ संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, जबकि आधुनिक जीवनशैली के कारण प्रकृति से बढ़ती दूरी तनाव और असंतुलन को जन्म दे रही है। बैठक में पेड़-पौधों की देखभाल, जल संरक्षण तथा स्वच्छ पर्यावरण बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि प्रकृति के बीच समय बिताने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
सदस्यों ने छोटी-छोटी आदतों जैसे प्लास्टिक का कम उपयोग, जल और ऊर्जा की बचत को पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण बताया और कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता ही एक बेहतर और स्वस्थ भविष्य की नींव है। ग्लोबल वार्मिंग जैसे गंभीर मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त करते हुए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही आने वाली पीढ़ी को प्रकृति के प्रति जागरूक बनाने और उसे एक सच्चे मित्र की तरह समझने की आवश्यकता पर भी विचार व्यक्त किए गए। कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों अलका बत्रा, अशोक राही, तृप्ति पांडे, विनोद भारद्वाज, सुधीर माथुर, मीता सिंह, देवराज सिंह, विद्या जैन, टीना सहानी, निर्मला सेवानी, रानू श्रीवास्तव, सपना महेश, प्रेरणा, सरिता सिंह एवं रजनीश सिंघवी ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे चर्चा अत्यंत प्रेरणादायक रही।



