
वी. के. शारदा जी, जो वर्तमान में इंडोनेशिया में निवास कर रहे हैं, हाल ही में जयपुर प्रवास पर आए। इस दौरान उनकी मुलाकात सिम्पली जयपुर की प्रकाशक एवं लेखिका अंशु हर्ष से हुई। आपसी संवाद के दौरान जीवन, अनुभव और मूल्यों पर गहन चर्चा हुई। उन्हीं चर्चाओं का एक अंश इस लेख में प्रस्तुत है, जिसे अंशु हर्ष ने शब्दों में पिरोया है।
वी. के. शारदा जी ने अपने करियर की शुरुआत दूरदृष्टि और मेहनत के बल पर की। व्यापार की गहरी समझ, अवसरों को पहचानने की क्षमता और दृढ़ निश्चय ने उन्हें एक सफल उद्यमी बनाया । सन् 1990 के दशक में उन्होंने कोल ट्रेडिंग के क्षेत्र में कदम रखा। यह वह समय था जब ऊर्जा क्षेत्र में कोयले की मांग लगातार बढ़ रही थी। बदलते वैश्विक परिदृश्य को समझते हुए उन्होंने Virema Impex की नींव रखी। कंपनी ने धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
समय के साथ, जब वैश्विक ऊर्जा संक्रमण (Global Energy Transition) ने कोयले के उपयोग को लेकर नई चुनौतियां खड़ी की, तब शारदा जी ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए कंपनी को नए रास्तों की ओर मोड़ा। उन्होंने केवल कोल पर निर्भर न रहकर, कंपनी को iron ore, nickel ore, silica sand और अन्य खनिजों के ट्रेडिंग में भी आगे बढ़ाया। यह कदम Virema Impex को दीर्घकालिक स्थिरता और विकास की ओर ले गया।
आज Virema Impex सिर्फ एक ट्रेडिंग कंपनी नहीं, बल्कि एक ग्लोबल विज़न वाली संस्था है, जो पर्यावरण और नई ऊर्जा नीतियों को ध्यान में रखते हुए कारोबार को आगे बढ़ा रही है। इस पूरी यात्रा में वी. के. शारदा जी का नेतृत्व, उनकी सोच और बदलते समय के साथ खुद को ढालने की क्षमता सबसे बड़ी ताकत साबित हुई है। वी. के. शारदा जी का जीवन केवल व्यापार और सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे इंसान की यात्रा है जिसने अपने परिवार, परंपराओं और मूल्यों को भी उतना ही महत्व दिया जितना अपने काम को। वो अपने जीवन में ईमानदारी, परिश्रम और जिम्मेदारी को महत्व देते है । यही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी ताक़त है ।
पारिवारिक जीवन में वे एक आदर्श पति, स्नेही पिता प्यारे दादू और अपने पूरे परिवार के लिए प्रेरणा रहे हैं। उन्होंने हमेशा यह माना कि सच्ची सफलता वही है, जिसे परिवार के साथ बाँटा जाए। कारोबार की व्यस्तताओं के बावजूद वे परिवार के साथ समय बिताने, परंपराओं को निभाने और सामाजिक रिश्तों को संभालने में पीछे नहीं रहते। उनकी पत्नी रेखा हमेशा उनके साथ एक मज़बूत सहारा बनी रहीं। कठिन समय में उनका विश्वास और प्रोत्साहन, शारदा जी के लिए हिम्मत का स्रोत रहा। उनके बच्चे भी उनकी इसी सोच से प्रेरित होकर आगे बढ़ रहे हैं। शारदा जी का मानना है कि परिवार ही इंसान की असली पूँजी है और यही जीवन के हर उतार-चढ़ाव में सहारा देता है।
शारदा जी कहते है कि ” रामायण यह विश्वास दिलाती है कि जब ईश्वर साथ हैं तो किसी भी कार्य की सफलता में संदेह नहीं है” . इसके पाठ से मन में शांति और संतोष का वास होता है और जीवन के उतार-चढ़ाव सहज और सरल प्रतीत होने लगते हैं। इंडोनेशिया में रहते हुए भी शारदा जी अपने परिवार के साथ चौबीस घंटे का अखंड रामायण पाठ करते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि रामायण केवल आध्यात्मिक समझ ही नहीं बढ़ाती, बल्कि परिवार को भी एक सूत्र में बाँधती है। यह हमें रिश्तों का सम्मान करना, बड़ों का आदर और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाना सिखाती है। इस प्रकार, रामायण साधारण मनुष्य के जीवन में न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि उसे सही दिशा, आत्मिक बल और जीवन को संतुलित एवं सफल बनाने की शक्ति भी प्रदान करती है।
इसी प्रेरणादायी जीवन यात्रा का प्रभाव अब नई पीढ़ी में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। शारदा जी के पौत्र अनंत ने अपने दादाजी के संघर्ष, मूल्यों और अनुभवों से प्रेरित होकर एक पुस्तक लिखी है, जिसका शीर्षक है “Foundation of Resilience”। इस पुस्तक में अनंत ने शारदा जी के जीवन के उतार-चढ़ाव, चुनौतियों और उनसे मिली सीख को अपने शब्दों में अभिव्यक्त किया है। यह कृति केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस सोच और दृढ़ता का प्रतिबिंब है, जो हर पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। इस प्रकार, शारदा जी की जीवन यात्रा न केवल उनके अपने व्यक्तित्व को परिभाषित करती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सशक्त मार्गदर्शक बन रही है।
- अंशु हर्ष



