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आरआईसी में डॉ. राकेश हूजा की स्मृति में संगोष्ठी का हुआ आयोजन

जयपुर, राजस्थान का ‘अधिकतम शासन – न्यूनतम सरकार’ वाला शासन मॉडल राज्य की प्रशासनिक शक्ति और विविधता को दर्शाता है। राजस्थान अपने विभिन्न क्षेत्रों में अपार विविधता समेटे हुए है और यह कई यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के साथ एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य भी है। राज्य में एक आईएएस अधिकारी की यात्रा रेगिस्तानी जिलों से लेकर सिंचित क्षेत्रों तक फैली होती है, जिसे एक सुदृढ़ शासन व्यवस्था का समर्थन प्राप्त है और यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावी सिद्ध हुआ है। यह बात राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव, श्री वी. श्रीनिवास, आईएएस ने डॉ. राकेश हूजा की स्मृति में राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में आयोजित संगोष्ठी के दौरान कही। उन्होंने ‘सिटीजन-सेंट्रिक गवर्नेंस’ विषय पर अपने विचार साझा किए। उल्लेखनीय है कि जयपुर में यह संगोष्ठी का प्रथम संस्करण था, जो कि ‘रिफॉर्मेटिव गवर्नेंस’ विषय पर आयोजित हुआ।

स्वर्गीय डॉ. राकेश हूजा के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए श्री वी. श्रीनिवास ने उन्हें एक सम्मानित शिक्षाविद और संस्थान निर्माता बताया, जो राजस्थान के विकास के प्रति गहराई से समर्पित थे। उन्होंने 1994–95 में कमांड एरिया डेवलपमेंट विभाग में उनके अधीन कार्य करने तथा बाद में एचसीएमरीपा के डायरेक्टर जनरल के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उनके साथ काम करने की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि डॉ. हूजा की विरासत उनके शैक्षणिक योगदानों के माध्यम से आज भी जीवित है। श्री श्रीनिवास ने उन्हें अपने साथ कार्य करने वाले सबसे विद्वान आईएएस अधिकारियों में से एक बताते हुए उनके महत्वपूर्ण पदों पर लंबे और प्रभावशाली कार्यकाल को भी रेखांकित किया।

मुख्य सचिव ने आगे कहा कि राजस्थान में भारतीय प्रशासनिक सेवा अपनी निष्पक्ष और संतुलित निर्णय प्रक्रिया के कारण सम्मानित है, जो संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होती है। उन्होंने कहा कि “नैतिक भारत” का दृष्टिकोण इस विश्वास पर – “मैं नैतिक हूं, मैं जवाबदेह हूं, मैं आईएएस हूं” आधारित है। मजबूत संस्थानों पर जोर देते हुए उन्होंने जिला कलेक्टर की भूमिका को एक विशिष्ट और सम्मानित आदर्श बताया। उन्होंने शासन में तकनीक की भूमिका को भी रेखांकित किया और कहा कि आधार, डीबीटी, यूपीआई और मनरेगा जैसी डिजिटल पहलों एवं कल्याणकारी योजनाओं ने सेवा वितरण को और अधिक सशक्त बनाया है। उन्होंने इस संगोष्ठी को ‘विकसित राजस्थान’ की दिशा में सुधारों पर विचार-विमर्श के लिए समयानुकूल बताया और प्रो. हिमांगिनी हूजा की सराहना की।

कार्यक्रम के अंतर्गत एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का भी आयोजन हुआ। जिसमें राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ललित के. पंवार, आईएएस (सेवानिवृत्त) और महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री सतीश माथुर, आईपीएस (सेवानिवृत्त) ने अपने विचार रखे। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार स्वाति वशिष्ठ द्वारा किया गया, जिन्होंने विभिन्न दृष्टिकोणों को सामने लाते हुए चर्चा को रोचक बनाया।

इस अवसर पर, डॉ. ललित के. पंवार ने कहा “भारत में वर्षों से शासन में कई बदलाव आए हैं, लेकिन जनता हमेशा केंद्र में रही है। सिटिजन-सेंट्रिक गवर्नेंस ‘सहभागिता’, ‘जवाबदेही’, ‘पारदर्शिता’ और ‘सुगमता’ के माध्यम से ही संभव है। प्रशासनिक अधिकारियों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जनता प्रशासन को दो नज़रिए से आंकती है — पहला, ‘गो गैटर’ यानी पहल करने वाला, और दूसरा, ‘लेटिंग थिंग्स हैपन’ यानी जैसा हो रहा है उसे वैसे ही होने देने वाला। उन्होंने आगे प्रकाश देते हुए कहा कि पहले केवल प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ही कार्य में कमी या निष्क्रियता को उजागर करने के माध्यम थे। लेकिन अब सोशल मीडिया भी एक प्रमुख मंच बन गया है, जहां कोई भी कुछ भी पोस्ट कर सकता है। इसलिए, सभी को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।”

चर्चा के दौरान श्री सतीश माथुर ने ज़ोर देकर कहा कि “जो पुलिस अधिकारी फील्ड में तैनात हैं, वे आसानी से उपलब्ध होने चाहिए। नागरिकों को उनसे आसानी से मिल पाने की सुविधा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब राजनीतिक नेताओं के साथ स्थिति का सामना होता है, तो यदि कोई पुलिस अधिकारी भ्रष्ट नहीं है, कोई अनुचित मांग नहीं करता और निष्पक्ष निर्णय लेता है, तो राजनीतिक नेता इसे समझते हैं और कोई समस्या उत्पन्न नहीं करते। वहीं, यदि कोई पुलिस अधिकारी पक्षपाती हो और निष्पक्ष नहीं हो, तो समस्या उत्पन्न हो सकती है।”

कार्यक्रम के अंत में हिमांगिनी हूजा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इससे पूर्व, पैनलिस्टों और मुख्य वक्ता को मीनाक्षी हूजा, श्री रमेश अरोड़ा, रीमा हूजा, श्री रजत हूजा और श्री रक्षत हूजा द्वारा सम्मानित किया गया।

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