सूर्य नमस्कार: 12 सरल मुद्राएं जो कुंडलिनी शक्ति को जागृत कर सकती हैं!

Before Suryanamaskar chakras
After Suryanamaskar chakras
हर सुबह लाखों लोग योगाभ्यास के रूप में सूर्य नमस्कार करते हैं। लेकिन क्या यह प्राचीन व्यायाम प्रकार केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तक ही सीमित है?
शास्त्र क्या कहते हैं?
योगशास्त्र और आयुर्वेद के अनुसार, सूर्य नमस्कार के समय शरीर का आगे–पीछे झुकना, लयबद्ध श्वास और मंत्रों का जाप — ये सब मिलकर शरीर के ‘कुंडलिनी चक्रों‘ को सक्रिय और संतुलित करते हैं। इतना ही नहीं, यह रीढ़ के मूल में स्थित सुप्त ‘कुंडलिनी शक्ति’ को जगाकर उसे ‘सुषुम्न नाड़ी’ द्वारा ऊपर की ओर ले जाने में सहायक है, जिससे व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर लाभ होता है।
प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम
हाल ही में महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय (MAV) के शोध दल ने शरीर के कुंडलिनी चक्रों पर सूर्य नमस्कार के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए एक प्रयोग किया।
इसके लिए शोधकर्ताओं ने रूसी वैज्ञानिक डॉ. कॉन्सटेंटिन कोरोतकोव द्वारा विकसित ‘बायो–वेल जीडीवी’ (गैस डिस्चार्ज विजुअलाइजेशन) उपकरण का उपयोग किया। यह उपकरण किसी व्यक्ति के उंगलियों से निकलने वाले सूक्ष्म प्रकाश कणों (फोटॉन) को ग्रहण करके उसके ऊर्जा क्षेत्र और चक्रों की स्थिति का विश्लेषण करता है।
यह प्रयोग MAV के एक साधक डॉ. भिकाजी भोसले (आयु 70 वर्ष) पर किया गया। उनकी सूर्य के बारह पारंपरिक नामों के उच्चारण के साथ सूर्य नमस्कार के 12 चक्र करने से पहले (चित्र 1) और बाद में (चित्र 2) रीडिंग ली गई। इन रीडिंगस को उपकरण से प्राप्त अगले २ कुंडलिनी चक्रों के चित्रों से समझा जा सकता है।
सूर्य नमस्कार के बाद चक्रों में दिखाई दिए उल्लेखनीय बदलाव
छह चक्रों का आकार बढ़ गया: सूर्य नमस्कार के बाद उनके कुंडलिनी चक्रों को शक्ति प्राप्त हुई और वे अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम हुए।
चार चक्र मध्यरेखा (सुषुम्ना नाड़ी) के सीध में आ गए – यह दर्शाता है कि चक्रों की ईश्वरीय तत्त्व ग्रहण करने की क्षमता बढ़ गई।
तीन चक्र निष्क्रिय हो गए – यह दर्शाता है कि अंतर्मुखता बढ़ गई जो ‘मनोलय’ (मन का धीरे–धीरे विलीन होना) में सहायक है।
विशुद्ध (कंठ) चक्र के आकार में थोड़ी कमी देखी गई– डॉ. भोसले ने सूर्य मंत्रों का मुख से (मौखिक) उच्चारण किया था। वाणी विशुद्ध चक्र से संबंधित होने के कारण, इस चक्र पर सर्वाधिक आध्यात्मिक उपचार हुआ, जिससे उसमें संचित कष्टदायक ऊर्जा कम हो गई।
एक सरल; लेकिन शक्तिशाली सर्वांगीण व्यायाम प्रकार !
निष्कर्ष बताते हैं कि सूर्य नमस्कार का प्रभाव केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, यह एक सूक्ष्म वैज्ञानिक प्रक्रिया है जो आपकी कुंडलिनी शक्ति को सक्रिय और संतुलित कर सकता है।
तनाव, चिंता और हानिकारक किरणोत्सर्ग के इस युग में, यह प्राचीन योग प्रकार जीवन को दैवी ऊर्जा से भरपूर करने के लिए एक सरल, लेकिन शक्तिशाली उपाय है, यह इस प्रयोग से स्पष्ट हुआ।
इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर, आइए प्रतिदिन वैश्विक आध्यात्मिक सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ने का संकल्प लें!
— डॉ. (श्रीमती) नंदिनी दुर्गेश सामंत, महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय, गोवा।



