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राजस्थानी संस्कृति, परंपरा, लोकनृत्य, संगीत और व्यंजनों से सजा रंगारंग आयोजन

राजस्थान फाउंडेशन नैरोबी चैप्टर एवं राजस्थान एसोसिएशन ऑफ केन्या के संयुक्त तत्वावधान में नैरोबी के 5-स्टार नोवोटेल होटल, नैरोबी वेस्टलैंड्स, लोअर काबेटे रोड में भव्य तीज महोत्सव का आयोजन किया गया। केन्या में रहने वाले राजस्थानी समाज के परिवारों, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरा आयोजन राजस्थानी संस्कृति, परंपरा, संगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक परिधान और आपसी भाईचारे से सराबोर रहा। कार्यक्रम का वातावरण ऐसा था मानो नैरोबी में राजस्थान जीवंत हो उठा हो।सभी ने राजस्थान के प्रसिद्ध व्यंजनों का आनंद लिया, जिनमें विशेष रूप से दाल बाटी चूरमा , मिर्ची बड़ा, बेसन गट्टे, विभिन्न पारंपरिक राजस्थानी पकवान एवं मिठाइयाँ शामिल रहीं। इन पारंपरिक व्यंजनों ने उपस्थित लोगों को राजस्थान के घर-आंगन और उसकी समृद्ध खान-पान की परंपरा की याद दिला दी।
लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम में कलाकारों एवं प्रतिभागियों द्वारा पारंपरिक राजस्थानी लोकनृत्य, संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। रंग-बिरंगे राजस्थानी परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने पूरे आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। महिलाओं और बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने कार्यक्रम की रौनक बढ़ा दी। इस अवसर पर राजस्थान फाउंडेशन नैरोबी चैप्टर के प्रेसिडेंट एवं राजस्थान एसोसिएशन ऑफ केन्या के फाउंडर चेयरमैन डॉ. सोनवीर सिंह ने कहा कि— “तीज केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा, पारिवारिक मूल्यों और आपसी एकता का उत्सव है। हमारा प्रयास है कि केन्या में रहते हुए भी हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी राजस्थान की जड़ों, भाषा, संस्कृति और परंपराओं से मजबूती से जुड़ी रहें। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन प्रवासी राजस्थानियों को एक-दूसरे से जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
डॉ. सोनवीर सिंह ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाली पूरी आयोजन टीम, स्वयंसेवकों, कलाकारों, सहयोगियों, परिवारों एवं समाज के सभी सदस्यों का हृदय “तीज केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा, पारिवारिक मूल्यों और आपसी एकता का उत्सव है। हमारा प्रयास है कि केन्या में रहते हुए भी हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी राजस्थान की जड़ों, भाषा, संस्कृति और परंपराओं से मजबूती से जुड़ी रहें।उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन प्रवासी राजस्थानियों को एक-दूसरे से जोड़ते है ” ।



