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‘भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर नाट्य मंचन और संगोष्ठी का हुआ आयोजन

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् ,जयपुर द्वारा *’भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस ‘पर हुए समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विख्यात लेखक और विचारक होनगासंद्र वेंकटरमय्या शेषाद्रि की प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति और देश बंट गया ‘ पर आधारित नाटिका का मंचन और संगोष्ठी का आयोजन जयपुर के पाथेय भवन स्थित श्री नारद सभागार ने हुआ। परिषद् के प्रदेश संयुक्त महामंत्री डॉ ओम प्रकाश भार्गव ने बताया कि आगामी लोकमंथन समारोह की कड़ी में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रदेश भर के कई लेखक, शिक्षाविद् और पत्रकार बंधु उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता जयपुर प्रांत प्रचारक श्री बाबू लाल जी ने अपने व्याख्यान में अखंड भारत परिकल्पना से प्रारंभ करते हुए कहा कि भारत के विभाजन की त्रासदी ऐतिहासिक रूप से 1947 में अवश्य हुई लेकिन उसके बाद आज भी भारत की धरती पर कई तरह के विभाजन हो रहे हैं।
उन्होंने इतिहास के पूरे परिदृश्य पर हिंदुओं की सहिष्णुता और राष्ट्रविरोधी तत्वों की अमानवीयता के बारे में बताया। उन्होंने भारत विभाजन के समय पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं और बच्चों पर हुए अमानवीय अत्याचार और व्यापक हिंदू नरसंहार के कुछ लोमहर्षक वृत्तांत सुनाते हुए तत्कालीन समय हुए दो करोड़ लोगों के विस्थापन पर पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने तत्कालीन शासन और राष्ट्र विभाजनकारी शक्तियों के मिले जुले षड्यंत्र को भारत के विभाजन की विभीषिका का उत्तरदायी ठहराया। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को भारत के विभाजन से सीख लेते हुए सजग रहने का आह्वान किया और भारत के सनातनी जनसंख्या की दर में गिरावट पर चिंता व्यक्त की। इस अवसर पर *दिल्ली की अदिति महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा नाट्य प्रस्तुति ‘ *और देश बंट गया* ‘ प्रस्तुत किया गया जिसमें भारत विभाजन की त्रासदी के मार्मिक दृश्य को देखकर सभागार में उपस्थित सभी दर्शकों की आँखें गीली हो गई।



